बातें मेरी, पसंद-नापसंद आपकी...

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Wednesday, June 15, 2011

रक्तदान-महादान...

कल, यानी की १४ जून को विश्व रक्तदान दिवस था। रक्त अर्थार्त खून को अभी तक कृत्रिम तरीके से नहीं बनाया जा सका है, पर प्राकृतिक रूप में ही इतना मानव-रक्त उपलब्ध है कि यदि इसकी कमी कि वजह से कोई मरता है तो यह मानव जाति पर कलंक है। हम जरा-जरा सी बात पर खून बहाने को तैयार हो जाते हैं पर जब खून देने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं, घबरा जाते हैं। १८ से ५५ वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन ५० किलो से ज्यादा हो, रक्तदान कर सकता है। एक बार रक्तदान करने के बाद, कम से कम तीन माह बाद ही दोबारा रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से किसी प्रकार की कमजोरी आदि नहीं आती है, क्योंकि हमारा शारीर चौबीस से अड़तालीस घंटे के अन्दर लगभग नब्बे प्रतिशत खून फिर से बना लेता है। रक्तदान से पहले यदि फलों का जूस पी लिया जाये और बाद में यदि गरम चाय या काफी पी ली जाये तो कमजोरी की शिकायत नहीं रहती है, यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। एक यूनिट रक्त से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकती है और किसी की जान बचाना पुण्य का काम है साथ ही इससे आत्मिक संतोष भी मिलता है। पर, रक्तदान के महत्व को बताने-समझाने की खबरिया चैनलों के पास जगह नहीं है, सरकार के पास शायद बजट नहीं है और हमारे-आपके के पास समय नहीं है। पर, मानवता के नाते हमें इसका महत्व तो समझना ही होगा।

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