अक्सर कहा जाता है की सरकारी कर्मचारी कामचोर होते हैं और यह काफी हद तक सही भी है। पर देखने वाली बात यह है की आखिर ऐसा क्यों है? काफी प्रयासों के बाद मुझे तो कुछ एक यह कारण समझ में आते हैं :-
1. कुछ तो जन्मजात कामचोर होते हैं। चाहे वो सरकारी हों या गैरसरकारी, घर में हों या बहार हों, वो कामचोर ही होते हैं। सरकारी होने से वो आसानी से बचे रहते हैं। वो 'दास मलूका' के इस दोहे का बखूबी पालन करते हैं की,
"अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम,
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।"
2. कुछ तो सरकारी होने की वजह से कामचोर हो जाते हैं। यानी की वे वैसे तो कामचोर नहीं होते हैं पर सरकारी नौकरी पाने के बाद यह सोच कर कामचोर हो जाते हैं की अब तो उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता, चाहे वे काम करें या न करें।
3. कुछ को यह लगता है की उनसे लिए जा रहे काम के बदले में, उन्हें मिलने वाला वेतन, भत्ते, बोनस, आदि काफी कम है। यानी की काम और वेतन के बीच का उनका एक स्वयं का पैमाना होता है और जब भी उन्हें लगता है की उनका काम उनको मिलने वाले वेतन-लाभों से ज्यादा हो गया है तो वे काम में कटौती या कामचोरी करने लगते हैं या काम के बदले में घूस मांगने लगते हैं।
4. कुछ तो काम करना चाहते हैं पर कार्यक्षेत्र (Workplace) में सुविधाजनक वातावरण (जैसे ख़राब कंप्यूटर, पर्याप्त रौशनी का न होना,पेन पेंसिल कागज़ की कमी, उचित तापमान का न होना, आदि) के न होने से काम नहीं कर पाते और कामचोरों की श्रेणी में आ जाते हैं।
5. कुछ को यह लगता है की उनका बॉस उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं करता है, इसलिए वे कामचोर हो जाते हैं।यानी की उन्हें लगता है की उनका बॉस पक्षपाती, पूर्वाग्रह से ग्रसित है और उनके काम का उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा है, ऐसे में उनके काम का कोई महत्व नहीं है, तो ऐसे में कामचोरी ही एकमात्र विकल्प है।
6. कुछ अपने सहकर्मियों के साथ सही ताल-मेल नहीं बैठा पाते हैं क्योंकि की उन्हें लगता है की उनका प्रमोसन, पोस्टिंग आदि उनके सहकर्मियों की अपेक्षा सही समय पर नहीं किया गया है और यह धारणा उन्हें कामचोर बना देती है।
7. कुछ कर्मचारी 'यूनियन' के नेता होने के नाते काम नहीं करते, क्योंकि ऐसा अघोषित नियम बना हुआ है की जो यूनियन का नेता होगा वो काम नहीं करेगा और न ही उससे काम लिया जायेगा।
8. कुछ सरकारी नौकरी के अलावा अपना कोई निजी व्यवसाय भी चलाते हैं, तो ऐसे में वे अपना ज्यादा समय व उर्जा नौकरी में न देकर अपने निजी कार्य में लगाते हैं, तो जाहिर है की नौकरी में कामचोरी करते हैं।
9. कुछ अपनी घरेलु समस्याओं, जैसे बूढ़े माँ-बाप, बीमार पत्नी, बच्चों की पढाई, जवान बहिन की शादी, बेरोजगार भाई, आदि से इतने घिरे रहते हैं की उन्हें आफिस के काम की फुर्सत ही नहीं मिलती और कामचोर हो जाते हैं। इन कारणों के सही या गलत का निर्णय आप पर है, साथ ही यह भी निवेदन है की यदि और कोई कारण आपकी जानकारी में हो तो कृपया अवगत कराने का कष्ट करें।