चार और पांच जून की मध्य रात्रि को, नई-दिल्ली के रामलीला मैदान पर बाबा रामदेव के नेतृत्व में चल रहे सत्याग्रह में, सरकार के इशारों पर पुलिस द्वारा दमनात्मक कार्यवाही की गयी और आन्दोलन को कुचला गया वह लोकतंत्र के लिए अत्यंत शर्मनाक है। साथ ही बाबा रामदेव द्वारा जिस तरह से भीड़तंत्र का सहारा लेकर सरकार को ब्लैकमेल किया जा रहा था वह भी जायज नहीं कहा जा सकता है। लोकतंत्र बनाम भीडतंत्र के इस खेल की निंदा की जानी चाहिए क्योंकि इस लडाई में मारा तो बेचारा आम आदमी ही जाता है।
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