आज सुबह जब सोकर उठा, तो पता चला कि कल रात को 'अन्ना जी का जनलोकपाल' पास हो गया है। उसके तुरंत बाद महसूस कर रहा हूँ कि, सब कुछ रातों-रात बदल गया है। अचानक ही चारों तरफ इमानदारी और नैतिकता कि हवा फैल गयी है। दूधवाले बिना पानी मिलाये दूध दे रहे हैं। दुकानदार बिना मिलावट किये सही तौल से सामान बेच रहे हैं। सड़कें साफ़-सुथरी हैं बिना किसे के कहे ही नगर-निगम के सफाईकर्मी साफ़-सफाई में जुटे हैं। लोग भी अपने घरों का कूड़ा, कूड़ादान में ही डाल रहे हैं। ठेकेदार इमानदारी से बिना किसी मिलावट के, मानक के अनुसार सड़क, पुल आदि बनाने में लगे हैं। लोग सड़क में नियमानुसार चल रहे हैं, दोपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाये हैं और चौपहिया वाहन चालक सीट-बेल्ट लगाये हैं। सरकारी कर्मचारी व अधिकारी समय पर दफ्तर पहुँच रहे हैं और इमानदारी के साथ अपना काम भी कर रहे हैं। शिक्षक वर्ग, टयूसन व कोचिंग बंद कर के क्लास में पढ़ा रहे हैं और विद्यार्थी भी मटरगस्ती करने के बजाये ध्यान लगाये पढ़ रहे हैं। नक़ल व पेपर-लीक जैसे घटनाएँ अब पुरानी बातें हो चुकी हैं। मीडिया ने पेड-न्यूज देना बंद कर दिया है, और पत्रकार-बन्धु इमानदारी से सही खबरें छाप व दिखा रहे हैं। व्यापारी वर्ग ने मिलावटखोरी व कालाबाजारी बंद कर दी है। वकीलों ने न्यायेपालिका कि दलाली बंद कर दी है और वे अब केस को ज्यादा लम्बा खींचने के बजाये जल्द से जल्द फैसला करवा रहे हैं; और तो और जज भी इमानदारी से फैसला सुनाने में विश्वास रख रहे हैं। सभी कमाने वाले लोग इमानदारी के साथ अपना टैक्स भर रहे हैं, यहाँ तक कि जिन्होंने पहले टैक्स चोरी कि थी वे भी अब टैक्स जमा करने के लिए लाइन लगाये खड़े हैं। ड्राइविंग टेस्ट व मेडिकल जांच के बाद ही इमानदारी से ड्राइविंग लायसन्स बनाये जा रहे हैं। लोग अपने बिजली, पानी, आदि टैक्स इमानदारी से जमा कर रहे हैं। रेलें सही समय से चल रही हैं और लोग टिकेट खरीद कर ही रेल व बस में यात्रा कर रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों में गरीबों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। अस्पतालों में नर्स व वार्डबॉय पैसा नहीं मांग रहे हैं, डाक्टर भी सेवाभाव से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। मंदिरों में आने वाले चढ़ावे से पुजारी गरीबों को मुफ्त भोजन व कपड़े बाँट रहे हैं। किसान, सब्जी व अनाज में मिलावट नहीं कर रहे हैं, उनको अपनी पैदावार की पूरी कीमत मिल रही है। लोगों ने अपने अवैध निर्माण व अतिक्रमण स्वयं ही गिरा दिए हैं, साथ ही पार्कों, सरकारी जमीन आदि से कब्जे भी हटा लिए गये हैं। सरकारी राशन दुकान के कोटेदार, नियमानुसार कार्डधारकों को चीनी, मिटटी का तेल आदि समय पर बाँट रहे हैं। नेताओं ने महंगी गाड़ी, हेलीकाप्टर, हवाईजहाज आदि से सफ़र करना बंद कर दिया है और वे अब साधारण गाड़ियों से चल रहे हैं। चोर, लुटेरे, डाकू, बलात्कारी, चैन-स्नैचर, गुंडे, आदि मेहनत व इमानदारी से जीवन यापन करने लगे हैं तथा साथ ही साथ समाजसेवा के कार्य भी कर रहे हैं। विदेशों में पड़ा सारा कालाधन वापस आ गया है और उससे स्कूल, अस्पताल, बिजलीघर, संस्कृतिक-केंद्र आदि बनवाए जा रहे हैं। पुलिसवाले चुस्त-दुरस्त होकर इमानदारी से अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। आदि, आदि, इत्यादि ...
कुल मिलाकर पूरे भारतीय समाज से भ्रसटाचार, बेईमानी, घूसखोरी, आदि पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।
उधर नई-दिल्ली के जंतर-मंतर में 'अन्ना जी' का स्थाई निवास व दफ्तर बन गया है। सभी दलों के नेता व आम जनता भी उनके आगे नतमस्तक हो कर बैठी रहती है तथा देश हित के सारे बड़े फैसले भी अब 'अन्ना जी' ही लेते हैं। जो भी 'अन्ना जी' कह देते हैं वही कानून बन जाता है। चूंकि नेताओं ने अब चुनाव लड़ना बंद कर समाजसेवा शुरू कर दी है, इसलिए संसद व विधानसभाओं का अस्तित्व अपने आप ही समाप्त हो गया है।
काश की 'अन्ना जी' का जनलोकपाल पास हो जाये और मेरा सपना सच हो जाये।
