मित्रों! मैंने अपने पिछले लेख में लिखा था कि 'अन्ना हजारे जी' के इस आन्दोलन से राजनेताओं (राजनैतिक दलों के नेताओं) को दूर रखें। काफी लोगों ने मुझसे यह सवाल किया था कि आखिर ऐसा क्यों।
पहला कारण तो यह है कि अन्ना जी भी शायद यही चाहेते हैं तभी तो उन्होंने अभी तक किसी भी राजनेता को अपने मंच पर जगह नहीं दी है और यही इस आन्दोलन कि अब तक कि सफलता का सबसे बड़ा कारण भी है।
दूसरा कारण यह है कि कोई भी राजनेता चाहे वह किसी भी दल का हो इमानदार नहीं है। अगर ईमानदार होता तो चुनाव में खर्च करने के लिए उसके पास लाखों-करोड़ों रुपये कहाँ से आते हैं?
तीसरा कारण यह है कि राजनेता जिस भी आन्दोलन का हिस्सा बनता है उसमे उसका उद्देश्य, अपना या अपने दल का स्वार्थ पूरा करना होता है। क्योंकि राजनेता का असली मकसद हमेशा सत्ता पाना होता है। उदहारण स्वरुप सन १९९१-१९९२ में अयोध्या में राम-मंदिर आन्दोलन कि मांग पर जब पूरा देश उठ खड़ा हुआ था तब एक राजनैतिक दल ने उस आन्दोलन को हाईजैक कर लिया था और फिर इस रास्ते से उस दल को तो सत्ता का लाभ मिल गया पर राम-मंदिर का हश्र आज हम सबको पता है। तो कोई राजनेता या राजनैतिक दल अगर इस आन्दोलन में अन्ना के साथ होने का दिखावा करेगा तो वोह तो इस रास्ते से सत्ता पा जायेगा पर देश भ्रसटाचार से मुक्त नहीं हो पायेगा।
इसलिए मैं बार-बार कहता हूँ कि अन्ना के इस आन्दोलन से राजनैतिक दलों और राजनेताओं को दूर रखें। यह लड़ाई अन्ना जी कि अगुआई में आम जनता लड़ेगी तो जीत निश्चित मिलेगी।


