बातें मेरी, पसंद-नापसंद आपकी...

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Thursday, May 19, 2011

उत्तर प्रदेश में बहनजी के मंत्री/विधायक जेल में...


उत्तर प्रदेश में राज कर रहीं बहनजी के बहुत से मंत्री / विधायक जैसे आनंद सेन, शेखर तिवारी, पुरषोत्तम द्विवेदी, अमर मणि त्रिपाठी, आदि किसी न किसी अपराध में सजा पाकर एक-एक कर जेल जा रहे हैं। अब ऐसा भी नहीं कहा जा सकता की सब के सब साफ़-सुथरे व्यक्ति थे और सत्ता में आने के बाद अचानक अपराधी बन गए। दरअसल में बहनजी ने चुनाव जीतने के लिए ऐसे लोगों को टिकट दिए जो महाबली और धनबली थे, उनके अपराधिक इतिहास या छवि पर गौर ही नहीं किया गया। अब चुनाव जीतने के बाद उनसे यह उम्मीद तो नहीं की जा सकती की वह अचानक संत-महात्मा बन जायेंगे। भैया! सियार पालोगे तो शिकार ही करेगा, प्रवचन तो नहीं देगा

Sunday, May 15, 2011

क्या अब अविवाहित ही राज करेंगे? ...

मई, २०११ में चार राज्यों व एक केंद्र शाषित प्रदेश में चुनाव संपन्न हुए। इनमे से दो राज्यों व एक केंद्र शाषित प्रदेश में होने वाले मुख्यमंत्री, ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल), जयललिता (तामिलनाडू) व एन० रंगास्वामी (पुदुचेरी) तीनों ही अविवाहित हैं। पूर्व से शासन कर रहे तीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी (गुजरात), मायावती (उत्तर प्रदेश) व बीजू पटनायक (उड़ीसा) भी अविवाहित हैं


इससे
पहले भी देश के प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके अटल बिहारी बाजपाई भी अ
विवाहित थे, साथ ही उनके समकालीन देश के राष्ट्रपति रहे अब्दुल कलाम भी अविवाहित थे। तो इससे क्या यह समझा जाये की अविवाहितों की संख्या भले ही कम हो पर शासन-सत्ता सँभालने की योग्यता उनमे ज्यादा होती है। या फिर यूँ कहा जाये की वर्तमान में फैलते भ्रस्टाचार में अविवाहित शासक फिर भी जनता को ज्यादा पसंद हैं क्योंकि उनके ज्यादा भ्रष्ट होने की उम्मीद विवाहितों से फिर भी कम है। क्या कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी भी इसीलिए विवाह बंधन से अभी तक दूरी बनाये हुए हैं? खैर जो भी हो पर जनता जनार्दन की जय हो!

Tuesday, May 10, 2011

पशचिमी उत्तर प्रदेश में किसान आन्दोलन

पशचिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति नॉएडा, गाजिअबाद, अलीगढ, मथुरा, आगरा आदि जिलों के किसान अपने खेतों के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ पिछले कुछ समय से उग्र आन्दोलन कर रहे हैं। उनके आन्दोलन को दबाने के लिए सरकारी बल का प्रयोग बड़ी बेदर्दी से किया जा रहा है।


सरकार, गरीब किसानों की जमीन छीनकर उन्हें बिल्डरों, उद्योगपतियों आदि में बाँट रही है क्योंकि देश के विकास के लिए बिल्डिंगों व उद्योगों की जरूरत है, खाने के अनाज की नहीं। एक बात समझ में नहीं आती है की गरीब किसानों की उपजाऊ जमीनें ही क्यों छिनी जाती हैं? क्या आजादी के बाद से एक भी ऐसा उदहारण है जिसमे किसी धनवान की जमीन छीनी गयी हो। सरकार किसानों को कुछ मुआवजा और लगने वाले उद्योग में नौकरी दे देती है। यानी की किसान को मालिक से उद्योगपति का गुलाम बना दिया जाता है। सरकार को करना तो यह चाहिए की जिस उद्योगपति या बिल्डर को किसान की जमीन दी जाये तो बदले में उसके फार्महाउस आदि किसानों को दे दिए जाएँ। अब जिसका काम खेती करना है वो खेती करे और जिसका काम उद्योग चलाना है वो उद्योग चलाये।

Friday, May 06, 2011

ओसामा बिन लादेन को तो मरना ही था


'ओसामा बिन लादेन' को तो मरना ही था, क्योंकि अपनी जिंदगी में वो इतने बुरे काम कर चुका था कि उसे तो पहले ही मर जाना चाहिए था। अब वो कैसे मरा, कब मरा, कहाँ मरा, किसने मारा, क्यों मारा, आदि-आदि प्रशनों पर पूर्ण विराम लगना चाहिए। अब मर गया तो मर गया इतना ही जान लेना जशन मनाने के लिए काफी है। मानवता के दुश्मन कि मृत्यु पर तरह-तरह के सवाल उठाये जाएँ यह तो ठीक नहीं है।