महात्मा गांधीजी बेचारे जब तक जिन्दा रहे तब भी चैन से जी नहीं सके , क्योंकि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते जीवन बीत गया। और, अब जब मर गये हैं तब भी लोग उन्हें चैन से रहने नहीं दे रहें है। जिसे देखो उनके समाधि-स्थल 'राजघाट' पर धरना देने चला जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले बाबा रामदेव अपने सत्याग्रह से पहले राजघाट पर फूल चढ़ा कर आये ही थे कि, पुलिस ने उनके अनशनस्थल पर लाठीचार्ज कर दिया और पीछे से भाजपा वाले वहां चौबीस घंटे का सत्याग्रह करने पहुँच गये, जिसमे गांधीजी को सुषमा स्वराज जी के ठुमके अलग झेलने पड़ गये। अब, आठ जून को अन्ना हजारे जी वहां एक दिन का सत्याग्रह करने जा रहे हैं। राजघाट जाना इनकी मजबूरी है या गाँधी के प्रति श्रधा यह तो वही जानें, पर शायद इसीलिए कहते हैं 'मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी'। भैया, मेरी आप सब से अपील है कि जिसका जीवन सुखी न रहा हो, कम से कम मरने के बाद तो उसे परेशान मत करो।
बातें मेरी, पसंद-नापसंद आपकी...
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Tuesday, June 07, 2011
बेचारे गांधीजी और राजघाट...
महात्मा गांधीजी बेचारे जब तक जिन्दा रहे तब भी चैन से जी नहीं सके , क्योंकि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते जीवन बीत गया। और, अब जब मर गये हैं तब भी लोग उन्हें चैन से रहने नहीं दे रहें है। जिसे देखो उनके समाधि-स्थल 'राजघाट' पर धरना देने चला जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले बाबा रामदेव अपने सत्याग्रह से पहले राजघाट पर फूल चढ़ा कर आये ही थे कि, पुलिस ने उनके अनशनस्थल पर लाठीचार्ज कर दिया और पीछे से भाजपा वाले वहां चौबीस घंटे का सत्याग्रह करने पहुँच गये, जिसमे गांधीजी को सुषमा स्वराज जी के ठुमके अलग झेलने पड़ गये। अब, आठ जून को अन्ना हजारे जी वहां एक दिन का सत्याग्रह करने जा रहे हैं। राजघाट जाना इनकी मजबूरी है या गाँधी के प्रति श्रधा यह तो वही जानें, पर शायद इसीलिए कहते हैं 'मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी'। भैया, मेरी आप सब से अपील है कि जिसका जीवन सुखी न रहा हो, कम से कम मरने के बाद तो उसे परेशान मत करो।
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