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Wednesday, August 17, 2011

'अन्ना हजारे जी' का आन्दोलन...

'अन्ना हजारे जी' के आन्दोलन के सम्बन्ध में मैं अन्ना जी की टीम से, आन्दोलनकारियों से और इस देश कि जनता से तीन बातें कहना चाहूँगा :-
() अन्ना जी का समर्थन करें -
आज हमको अन्ना जी के माध्यम से एक मौका मिला है कि हम इस देश कि एक बहुत बड़ी समस्या, भ्रसटाचार को जड़ से उखाड़ फेंके। यदि आज भी हम नहीं जागे तो आने वाली पीढियां हमको कभी माफ़ नहीं करेंगी। हम बिना किसी शर्त या स्वार्थ के अन्ना जी के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हों और इस आन्दोलन को मजबूती प्रदान करें। दूसरे गांधी के रूप में एक सच्चा और ईमानदार आदमी, उम्र के इस पड़ाव में हमारे लिए लड़ रहा है तो हम दिलोजान से उसका साथ दें और आन्दोलन को अहिंसात्मक बनाये रखें।
() स्वयं भी ईमानदार बनें - केवल घूस लेना-देना ही भ्रसटाचार नहीं है, यदि हम अपना कार्य इमानदारी से नहीं करते हैं तो वह भी भ्रसटाचार ही है। इसलिए आइये हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम चाहे जिस भी कार्यक्षेत्र में हों; जैसे सरकारी कर्मचारी, व्यापारी, विद्यार्थी, शिक्षक, डाक्टर, वकील, पत्रकार आदि; आज से अपने कर्त्तव्य के प्रति मन, वचन व कर्म से इमानदार बनेंगे और रहेंगे। केवल धरना-प्रदर्शन करने, सभा करने, कैंडल मार्च निकलने, उपवास रखने आदि से ही हम अन्ना जी के समर्थक नहीं बन सकते। जब हम स्वयं ईमानदार बनेंगे तभी हम सही मायने में अन्ना जी के आंदोलन के सच्चे समर्थक बन सकते हैं।
() राजनेताओं को दूर रखें - इस देश के सभी राजनैतिक दल और उनके नेता एक सौ एक प्रतिशत भ्रस्ट हैं। इसलिए राजनेताओं को इस आन्दोलन से दूर रखें उनकी बातों में न आयें। राजनेता चाहे जो कुछ भी हों पर इमानदार नहीं हो सकते। राजनेताओं को यदि मौका मिल गया तो वे, इस आन्दोलन में भेड़ के वेश में भेड़िया बनकर घुस जायेंगे और आन्दोलन को नष्ट-भ्रस्ट कर डालेंगे। इसलिए राजनेताओं को इस आन्दोलन में पास न आने दें।
अंत में मैं अन्ना जी को बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने भ्रसटाचार कि इस समस्या को जनांदोलन बनाया और अब हमें इसे मुकाम तक पंहुचाना होगा।

जय-हिंद, जय-भारत।

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