बातें मेरी, पसंद-नापसंद आपकी...

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Monday, August 15, 2011

'स्वतंत्रता दिवस' - क्या हम स्वतंत्र हैं...

आज १५ अगस्त यानी कि 'स्वतंत्रता दिवस' है। आज ही के दिन १९४७ में हमारा देश भारत, अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्र हुआ था, तो फिर इसका जशन होना भी चाहिए। पर स्वतंत्रता या आज़ादी का मतलब क्या सिर्फ इतना है कि साल में एक बार देशभक्ति के गीत सुन लो, तिरंगा फेहरा लो, या स्कूल में लड्डू बाँट दो बस हम आज़ाद हो गये। क्या हम सचमुच में आज़ाद हैं? नहीं, बिलकुल नहीं आज देश का बहुत बड़ा वर्ग 'मीडिया' का गुलाम है। हम वही करते हैं, वही खाते हैं, वही पहनते हैं, वहीँ वोट देते हैं, यहाँ तक कि वही सोचते भी हैं जो टी० वी० चैनल या अखबार हमें बार-बार दिखाते, सुनाते, या पढ़ाते हैं। हम और हमारे विचार या सोच मीडिया के गुलाम हो गये हैं। कुछ नया, कुछ आगे या कुछ अलग हट कर सोचने कि हमारी क्षमता लगभग ख़तम हो गयी है। मीडिया कह दे कि यह सही है तो हम सही मान लेते हैं और कह दे कि गलत है तो हम गलत मान लेते हैं। अरे भाई अपने विचारों को पंख दीजिये, उन्हें ऊँची उड़ान दीजिये। बस यह ध्यान रखना कि विचार सकारात्मक हों।
विचारों या सोच कि स्वतंत्रता ही सही स्वतंत्रता है, केवल राजा बदल जाने से गुलाम आज़ाद नहीं हो जाता है।

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