
इससे पहले भी देश के प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके अटल बिहारी बाजपाई भी अविवाहित थे, साथ ही उनके समकालीन देश के राष्ट्रपति रहे अब्दुल कलाम भी अविवाहित थे। तो इससे क्या यह समझा जाये की अविवाहितों की संख्या भले ही कम हो पर शासन-सत्ता सँभालने की योग्यता उनमे ज्यादा होती है। या फिर यूँ कहा जाये की वर्तमान में फैलते भ्रस्टाचार में अविवाहित शासक फिर भी जनता को ज्यादा पसंद हैं क्योंकि उनके ज्यादा भ्रष्ट होने की उम्मीद विवाहितों से फिर भी कम है। क्या कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी भी इसीलिए विवाह बंधन से अभी तक दूरी बनाये हुए हैं? खैर जो भी हो पर जनता जनार्दन की जय हो!
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