
सरकार, गरीब किसानों की जमीन छीनकर उन्हें बिल्डरों, उद्योगपतियों आदि में बाँट रही है क्योंकि देश के विकास के लिए बिल्डिंगों व उद्योगों की जरूरत है, खाने के अनाज की नहीं। एक बात समझ में नहीं आती है की गरीब किसानों की उपजाऊ जमीनें ही क्यों छिनी जाती हैं? क्या आजादी के बाद से एक भी ऐसा उदहारण है जिसमे किसी धनवान की जमीन छीनी गयी हो। सरकार किसानों को कुछ मुआवजा और लगने वाले उद्योग में नौकरी दे देती है। यानी की किसान को मालिक से उद्योगपति का गुलाम बना दिया जाता है। सरकार को करना तो यह चाहिए की जिस उद्योगपति या बिल्डर को किसान की जमीन दी जाये तो बदले में उसके फार्महाउस आदि किसानों को दे दिए जाएँ। अब जिसका काम खेती करना है वो खेती करे और जिसका काम उद्योग चलाना है वो उद्योग चलाये।
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