किरण बेदी जी का राजनीती में स्वागत है (न, न करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे)… इसी के साथ "अन्ना आंदोलन" से जुड़े महत्त्वपूर्ण लोगों जैसे केजरीवाल, वी० के० सिंह, किरण बेदी, बाबा रामदेव, कुमार विश्वास, आदि-आदि का यह सच भी सामने आ गया की वो जनलोकपाल नहीं बल्कि अपनी-अपनी राजनीतिक हसरतें पूरी करना चाहते थे… अन्ना जी तो बेचारे अब मुँह दिखाने लायक भी नहीं बचे… जनलोकपाल तो रद्दी की टोकरी में भी ढूंढे नहीं मिलेगा… देखिये अभी कुछ और सच भी धीरे-धीरे सामने आएँगे… आम जनता तो हमेशा की तरह ठगी जाएगी… समाजसेवा करने वाले तो कैलाश सत्यार्थी जी की तरह खामोशी से अपना काम करते हैं; तम्बू गाड़कर, माइक लगाकर, भीड़ एकत्रितकर, मीडिया बुलाकर तो केवल राजनीति होती है… जय हो…
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