बातें मेरी, पसंद-नापसंद आपकी...

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Wednesday, September 14, 2011

यह 'दिवस' का मामला बड़ा कनफ्युसिंग है...

कल १४ सितम्बर को 'हिंदी दिवस' था। यानि इस दिन हिंदी को बढ़ावा देना है, उसका प्रचार-प्रसार करना है और उसे जन-जन तक पहुँचाना है। बड़ी अच्छी बात है, आखिर हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा दोनों है। लेकिन केवल एक दिन दिवस मना लेने भर से इसका कुछ भला हो पायेगा ऐसा मुझे तो नहीं लगता है। खैर जो भी हो, पर जो भी प्रयास किये जा रहे हैं उनको कोसने के बजाये उसमे सहयोग करना चाहिए।
अभी कुछ दिन पहले ११ जुलाई को 'विश्व जनसँख्या दिवस' था। अरे नहीं भाई, इस दिन जनसँख्या को बढ़ावा नहीं देना है, बल्कि दिनोंदिन बढ़ती हुई जनसँख्या को कैसे रोका जाये या घटाया जाये इस पर विचार करना है।
भाई! इसीलिए यह 'दिवस' मुझे जरा समझ में नहीं आते हैं, और कनफ्युस कर देते हैं। मतलब 'हिंदी दिवस' में हिंदी को बढ़ाना है, पर 'जनसंख्या दिवस' में जनसँख्या को घटाना है। इसलिए मेरा एक सुझाव है, कि दिवसों के भ्रमित कर देने वाले नामों को बदल देना चाहिए, जैसे 'हिंदी दिवस' को 'हिंदी बढाओ दिवस' व 'जनसँख्या दिवस' को 'जनसँख्या घटाओ दिवस' कर देना चाहिए। जिससे कम से कम मेरे जैसे, कम पढ़े-लिखे लोग भी इनका मतलब आसानी से समझ सकें।

1 comment:

  1. दीपावली केशुभअवसर पर मेरी ओर से भी , कृपया , शुभकामनायें स्वीकार करें

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